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SGD 5.41

वैदेही व्यथा

यह रचना सीता के वनवास को आधार बना कर लिखी गयी है । केवल जन मन रंजन के लिये एक धोबी के कहने को आधार बना कर भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण के द्वारा अपनी पतिव्रता पत्नी जनकनन्दिनी सीता को वन में भिजवा दिया । न उन्हें उनका अपराध या दोष बताया गया और न उन्हें कुछ कहने का ही अवसर दिया गया । जब उनका वन में परित्याग किया गया तब वे गर्भवती थीं । उस अवस्था में पति द्वारा परित्याग का दंश झेलनेवाली सीता के मन मे उठने वाले विभिन्न प्रश्नों, आशंकाओं को ही शब्द देने का प्रयास प्रस्तुत खण्डकाव्य में किया गया है । यह एक परित्यक्ता नारी की व्यथा की अभव्यक्ति है जो अंत तक अपने प्रिय की प्रतीक्षा करती रहती है, उसे अंतर्मन से पुकारती रहती है...


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